पीएमएफएमई योजना को सफल बनाने में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका: संजय यादव

कारोबार झारखंड न्यूज़ रांची
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पीएमएफएमई बैंकर्स कॉन्क्लेव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बैंकर्स सम्मानित

रांची: झारखंड सरकार के उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि पीएमएफएमई योजना का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को गांवों तक पहुंचाकर सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को सशक्त बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना की सफलता में बैंकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
बुधवार को रांची स्थित होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित पीएमएफएमई बैंकर्स कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि इस योजना के माध्यम से कमजोर वर्ग की महिलाओं को गांवों में ही समूह बनाकर रोजगार से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें काम की तलाश में दिल्ली, मुंबई या कोलकाता जैसे महानगरों की ओर पलायन न करना पड़े। राज्य सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार के अवसर सृजित कर लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।

गांव-गांव में योजनाओं का प्रचार-प्रसार करें


उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, वार्ड सदस्यों, मुखिया और जिला परिषद सदस्यों से अपील की कि वे गांव-गांव में योजनाओं का प्रचार-प्रसार करें, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभुक योजना का लाभ उठा सकें। मंत्री ने बैंक प्रबंधकों और अधिकारियों से संवेदनशील रवैया अपनाने तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि औपचारिकताओं में उलझने के बजाय समस्याओं के समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही झारखंड के उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर जोर देते हुए कहा कि राज्य के उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहचान  दिलाने की आवश्यकता है।


पीएमएफएमई योजना में झारखंड 11वें नंबर पर: अरवा राजकमल

उद्योग सचिव अरवा राजकमल ने बताया कि  फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के औपचारिकरण के लिए संचालित इस योजना के तहत झारखंड ने उल्लेखनीय प्रगति की है। देशभर में राज्य अब 11वें स्थान पर पहुंच चुका है, जबकि पहले निचले तीन राज्यों में गिना जाता था। उन्होंने कहा कि ढाई वर्षों में पांच वर्षों के बराबर उपलब्धि हासिल की गई है और गोड्डा जिला उत्कृष्ट प्रदर्शन का उदाहरण बनकर उभरा है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। आवेदनों की अस्वीकृति दर अधिक है, जिसे पारदर्शी प्रक्रिया से कम करना होगा। बैंकों में लंबित मामलों, विशेषकर एसबीआई में 763 लंबित आवेदनों के शीघ्र निष्पादन की आवश्यकता है। 5,000 स्वीकृत आवेदनों में से केवल 1,000 में ही राशि वितरित हो पाई है, जिनमें 400 मामले ग्रामीण बैंक के हैं। इस अंतर को पाटना प्राथमिकता है।
एसएलबीसी के डीजीएम संतोष कुमार सिन्हा ने कहा कि योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य का अभी तक केवल 42 प्रतिशत ही हासिल हो पाया है, जो चिंताजनक है। बैंकर्स ने संयुक्त रणनीति बनाकर वित्तीय वर्ष के लक्ष्य को पूरा करने का संकल्प लिया है।


झारखंड की जलवायु खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए अनुकूल: विशाल सागर

स्वागत भाषण देते हुए उद्योग निदेशक विशाल सागर ने कहा कि यह केंद्र और राज्य सरकार की साझा योजना है, जिसमें बैंक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। बैंक स्तर पर आवेदन स्वीकृत होने के बाद ही सब्सिडी और ऋण की सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि झारखंड उन अग्रणी राज्यों में है, जहां बैंकर्स कॉन्क्लेव की पहल की गई है।


उन्होंने बताया कि झारखंड की कृषि-जलवायु परिस्थितियां खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए अनुकूल हैं। बदलती अर्थव्यवस्था और कार्यबल में महिलाओं-पुरुषों की बढ़ती भागीदारी के कारण प्रोसेस्ड फूड की मांग बढ़ रही है। प्रोसेसिंग का अर्थ केवल पैकेजिंग नहीं, बल्कि वैल्यू एडिशन और पोषण गुणवत्ता में सुधार भी है।
उन्होंने सुझाव दिया कि गुमला में सफल रागी उत्पादन जैसे उत्पादों को एकीकृत कर ‘झारखंड के विशिष्ट उत्पाद’ के रूप में बड़े स्तर पर ब्रांडिंग की जाए, ताकि राज्य के सूक्ष्म उद्यमी राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

कॉन्क्लेव में आईसीएआर-एनआईएसए के निदेशक अभिजीत कर, उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक प्रणब कुमार पाल, प्रीति रानी समेत विभाग के अधिकारी, विभिन्न बैंकों के अधिकारी, फूड प्रोसेसिंग से जुड़े लोग उपस्थित थे। उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को सम्मानित किया गया।

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