सर्वोच्च न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर पुनः जताया विश्वास

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40वीं बार देश के संवैधानिक न्यायालय ने इवीएम के ख़िलाफ़ याचिका की ख़ारिज

बिना किसी सबूत और दस्तावेज बार बार हर बार इवीएम की चोरी, इवीएम की गड़बड़ी और कमियों को लेकर की जा रही याचिकाओं पर न्यायालय नाराज़

न्यायालय द्वारा आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया

रांची/दिल्ली: इवीएम पर पुनः एक बार विश्वास जताते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दो रिट याचिकाएँ खारिज कर दीं। इनमें एक याचिका 19 लाख से अधिक इवीएम के गुम हो जाने से संबंधित थी जबकि दूसरी चुनाव में बैलेट पेपर के उपयोग से संबंधित थी।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के गुम होने की संभावना एवं आरोप पर दायर रिट में फैसला सुनाते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इन संभावनाओं और आरोपो को पूर्णतया बेबुनियाद करार देते हुए भारत निर्वाचन आयोग के पक्ष में फैसला सुनाया। ज्ञातव्य है कि वादी INCP  ने संभावना जताई थी कि वर्ष 2016-19 के दौरान भारत निर्वाचन आयोग की अभिरक्षा से 19 लाख गुम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के उपयोग वर्ष 2024 के आम सभा चुनाव में  किया जा सकता है।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1991 की धारा 61 A को विलोपित करते हुए चुनाव में बैलेट पेपर के उपयोग से संबंधित याचिका को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के अयोग्य करार दिया। न्याय मूर्ति खन्ना का मानना था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के कार्य-पद्धति से संबंधित 10 से भी ज्यादा मामलों में समय समय पर न्यायालय के द्वारा परीक्षण किया गया है। माननीय न्यायालय ने मामले को खारिज करते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की कार्य-पद्धति में पुनः अपना भरोसा जताया।

पिछले 10 वर्षों की अवधि में लगभग 40 ऐसे मामलों में देश के उच्चतर न्यायलयों ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों  और उससे संबंधित पारदर्शी प्रक्रिया एवं सख्त प्रशासनिक प्रोटोकॉल पर विश्वास जताते हुए भारत मे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों  के उपयोग हेतु संकल्पित एवं दृढ़ न्यायिक वातावरण को मजबूती प्रदान की है।

ज्ञातव्य है कि मध्य प्रदेश जन विकास पार्टी बनाम भारत निर्वाचन आयोग स्पेशल लीव पिटीशन सिविल 16870/2022 के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए कहा था कि देश में दशकों से EVM का उपयोग हो रहा है परंतु अब इस संबंध में बार बार मामले दर्ज किए जा रहें हैं। एक अन्य मामले ” सी आर  जया सुकिन बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य के मामले में माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली ने 10 हजार रुपये जमा करने का आदेश दिया था। इस याचिका में भी EVM के बदले बैलेट पेपर के उपयोग के लिए याचिका दायर की गयी थी।

पहले भी दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आगामी लोक सभा चुनाव में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में उपयोग होने वाले EVM एवं वीवीपैट मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग पर रोक लगाने संबंधी याचिका को माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय  द्वारा खारिज किया जा चुका है। इस मामले में वर्तमान निर्वाचन प्रणाली की पारदर्शिता पर विश्वास जाहिर करते हुए याचिकाकर्ता के दावों को खारिज कर दिया था।


EVM से संबंधित प्रणालियों एवं सुरक्षित प्रणाली को EVM मैनुअल,  स्टेटस पेपर, EVM प्रेजेंटेशन , EVM वोटिंग मशीनों के 40 वर्षों के सफर पर प्रकाशित पुस्तिका, EVM के न्यायिक इतिहास एवं अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों जैसे प्रकाशनों के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग सार्वजनिक प्लेटफार्म पर उनका अद्यतनीकरण कर प्रकाशित करता रहा है।

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