केंद्र के नए खनिज कानून से झारखंड को 15000 करोड़ का घाटा?
द जन सभा | निरंजन भारती
केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा संसद से खान और खनिज संशोधन विधेयक यानी MMDR बिल को बिना किसी बहस के पास कराए जाने के बाद झारखंड में भारी बवाल खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा JMM ने गुरुवार की देर शाम एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पार्टी नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला झारखंड के अधिकारों और यहाँ के आम लोगों के पेट पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद पांडेय ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी और कहा कि अगर केंद्र ने झारखंड के हक का पैसा और अधिकार वापस नहीं दिए, तो झामुमो 80 के दशक की तर्ज़ पर एक बार फिर राज्यव्यापी और उग्र आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि इस बार का आंदोलन इतना बड़ा और जोरदार होगा कि इसे पूरा देश और विश्व देखेगा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो ने इस नए संशोधन को झारखंड के अधिकारों पर डाका बताया है और इसके खिलाफ पूरे राज्य में विरोध के साथ-साथ कोयला और खनिज परिवहन को पूरी तरह रोकने यानी आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी दे दी है। इस पूरे विवाद की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला और केंद्र का नया कानून है। दरअसल, जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि राज्यों को अपनी ज़मीन और खनिजों पर टैक्स लगाने का पूरा अधिकार है। लेकिन केंद्र के इस नए MMDR कानून ने राज्यों से वह अधिकार छीन लिया है। सरल शब्दों में कहें तो ज़मीन और कोयला झारखंड का होगा, धूल-धुआं और प्रदूषण यहाँ के लोग सहेंगे, लेकिन उस खनिज पर कितना टैक्स लगेगा और उसका पैसा किसे मिलेगा, इसका फैसला दिल्ली में बैठकर केंद्र सरकार करेगी।
इस नए नियम से झारखंड को हर साल मिलने वाले राजस्व का बहुत बड़ा हिस्सा छिन जाएगा। राज्य सरकार का अनुमान है कि इस कानून की वजह से झारखंड को हर साल मिलने वाला लगभग 13,000 से 15,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड नहीं मिल पाएगा। इतना ही नहीं, जो पुराना बकाया टैक्स केंद्र या बड़ी कंपनियों पर था, इस कानून के लागू होने के बाद उसे भी रद्द माना जाएगा, जिससे राज्य को दोहरा नुकसान उठाना पड़ेगा। जब राज्य के खजाने में यह 15 हजार करोड़ रुपये नहीं आएंगे, तो इसका सीधा असर झारखंड के आम किसानों, मजदूरों और गरीबों पर पड़ेगा। राज्य सरकार का कहना है कि खजाना खाली होने से गरीबों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी।
महिलाओं को हर महीने मिलने वाली मइयां सम्मान योजना, बेघर किसानों के लिए बनने वाले अबुआ आवास और गाँव-देहात में बनने वाले स्कूल, अस्पताल और सड़कों के बजट में भारी कटौती करनी पड़ सकती है। इसी वजह से JMM और हेमंत सोरेन ने इसे राज्य विरोधी और काला कानून करार दिया है। जेएमएम ने साफ कर दिया है कि वे चुप नहीं बैठेंगे और राज्य के हर जिले, ब्लॉक और पंचायत में जाकर किसानों और ग्रामीणों को इसके खिलाफ जागरूक करेंगे। झामुमो ने चेतावनी दिया कि केंद्र सरकार ने झारखंड का हक और बकाया पैसा वापस नहीं लौटाया, तो राज्य से बाहर जाने वाले कोयले, लोहे और अन्य खनिजों के रास्तों को पूरी तरह ठप्प कर आर्थिक नाकेबंदी कर दी जाएगी।
