
योजना ने सिर्फ 15% लक्ष्य की प्राप्ति की है
रांची: BJP के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आज हेमंत सरकार की अबुआ आवास योजना को लेकर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह योजना गरीबों के लिए छत का सपना नहीं बल्कि निराशा का प्रतीक बन गई है।
अबुआ आवास योजना बनी अबुआ निराशा योजना
उन्होंने कहा कि सरकार ने 2026 तक 8 लाख पक्के मकान देने का वादा किया था और इसके लिए 16 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट तय किया था। लेकिन आज की हकीकत यह है कि पूरे राज्य में अब तक लक्ष्य का मुश्किल से 15 प्रतिशत प्राप्ति हो पाई है वो भी आधा अधूरा।प्रतुल ने कहा कि राज्य सरकार ने जो लक्ष्य निर्धारित किया था उसके अनुसार में 2023-24 में 2 लाख मकान,2024-25 में 3.5 लाख मकान, 2025-26 में 2.5 लाख मकान बनाने का लक्ष्य था ।
प्रतुल ने अनेक उदाहरण देते हुए बताया कि ये योजना अपने लक्ष्य से बहुत पीछे चल रही है और भ्रष्टाचार का भी शिकार हो गई है।प्रतुल ने कहा कि रांची (खलारी प्रखंड): 1033 मकानों का लक्ष्य, पूरे हुए सिर्फ 337।गढ़वा (भंडरिया प्रखंड): 850 मकानों का लक्ष्य, तैयार हुए महज़ 210।
दुमका (रामगढ़ प्रखंड): 720 का लक्ष्य, पूरे हुए केवल 150।पाकुड़ जिला: 950 मकानों का वादा, पूरे नहीं हुए 200 भी।चतरा व लातेहार में तो स्थिति और भी बदतर है।अधूरे मकानों में लोग बिना छत के रहने को मजबूर है।प्रतुल ने कहा कि कमोबेश पूरे राज्य की यही स्थिति है।
“कागज़ पर तिलिस्म, ज़मीन पर ढहता सपना”

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि हेमंत सरकार ने फाइलों में तो 6.5 लाख मकानों की स्वीकृति दिखा दी, लेकिन जमीन पर स्थिति यह है कि गरीबों के घर आधे-अधूरे खड़े हैं।फंड की समय पर उपलब्धता नहीं होने, भुगतान में देरी और कामकाज की सुस्ती के कारण लोग बरसात में बिना छत के जीने को मजबूर हैं।उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल विज्ञापन और घोषणाओं तक सीमित है। गरीबों के नाम पर बजट तो दिखाया जाता है, पर जमीन पर कुछ नहीं उतरता।प्रतुल ने कहा कि जनता पूछ रही है कि इतने बड़े बजट और वादों के बावजूद गरीबों के हिस्से में सिर्फ अधूरे मकान और टूटा हुआ सपना ही क्यों आया।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
