
द जन सभा डेस्क
कांके प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में मंगलवार को निजी सुरक्षा एजेंसी SIS लिमिटेड की ओर से सुरक्षा गार्ड और सुपरवाइजर की भर्ती के लिए कैंप लगाया गया। नौकरी की उम्मीद में जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से दर्जनों अभ्यर्थी यहां पहुंचे थे। दरअसल, SIS की ओर से जारी पत्र में रांची जिले के प्रखंडों में काउंसलिंग कैंप आयोजित करने की बात कही गई है और इसी सिलसिले में कांके में कैंप लगाया गया था। पत्र में सुरक्षा सुपरवाइजर के लिए 12वीं पास और सुरक्षा गार्ड के लिए 10वीं पास/फेल की योग्यता बताई गई है। सुपरवाइजर के लिए 19,500 से 30,000 रुपये और गार्ड के लिए 15,500 से 28,500 रुपये तक वेतनमान का भी उल्लेख है। सरकारी प्रखंड परिसर में कैंप सुनकर कई युवाओं को लगा कि शायद अंचल परिसर में लग रही कैंप सरकारी स्तर पर अधिकृत रोजगार प्रक्रिया है। लेकिन बहाल होने के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों से कथित तौर पर अवैध ढंग से रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर 350 की वसूली की जाने लगी। इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों ने इसकी शिकायत बीडीओ विजय कुमार और अंचल अधिकारी अमित भगत से की। उन्होंने इस संबंध में जानकारी ली तो पता चला कि पैसे लिए जा रहे हैं। इसपर अधिकारियों के कड़े तेवर के बाद एजेंसी के लोग अंचल परिसर से भाग खड़े हुए।
मामले में सबसे अहम बात SIS के उस पत्र को लेकर है, जिसमें भर्ती और शुल्क से जुड़ी शर्तें साफ लिखी गई हैं। पत्र में 350 रजिस्ट्रेशन फीस चयनित अभ्यर्थियों से ट्रेनिंग सेंटर पर लेने की बात कही गई है। इसके अलावा पत्र में ट्रेनिंग से जुड़े खर्चों का भी उल्लेख है। यानी दस्तावेज के मुताबिक रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान चयन के बाद ट्रेनिंग सेंटर पर होना था। इसके बावजूद कांके में कैंप में पहुंचे अभ्यर्थियों से पहले ही 350 रुपये मांगे जाने की शिकायत सामने आई। ऐसे में सवाल उठता है कि पत्र में नियम कुछ और, कैंप में प्रक्रिया कुछ और क्यों? दूसरा सवाल यह है कि निजी कंपनी को सरकारी प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में भर्ती कैंप लगाने की अनुमति किस आधार पर दी गई और अनुमति देने से पहले कंपनी की भर्ती प्रक्रिया और शुल्क की जांच किसने की? अपुष्ट सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेताओं ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।
बताते चलें कि कंपनी पर इससे पहले भी कर्मचारियों के वेतन, बोनस और अन्य भुगतान को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। उपलब्ध शिकायतों और दावों के मुताबिक, सीआईपी और बीएयू जैसे संस्थानों में काम करने वाले सुरक्षा कर्मियों ने वेतन और अन्य बकाया भुगतान को लेकर कानूनी रास्ता अपनाया था। लंबी सुनवाई के बाद एसआईएस को लगभग दो करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान एरियर के रूप में करने का आदेश कोर्ट द्वारा दिया गया है। सुरक्षाकर्मियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज तक एजेंसी ने भुगतान नहीं किया है। लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में अपनी मजबूत पकड़ के कारण यह एजेंसी राज्य सरकार के अधिकारियों की कृपा से विभिन्न प्रखंडों में भर्ती कैंप लगाकर युवाओं को लुभावने सपने दिखाने का कार्य कर रही है। किंतु राज्य के अधिकारियों और सत्ता में बैठे नेताओं को इसकी परवाह नहीं है कि इसने जो गड़बड़ियों की हैं, उसके आधार पर उसको कठोर दंड देकर युवाओं को ठगी से बचाए। इसके उलट उसको विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों में कैंप लगाकर बहाली की अनुमति दिया जाना प्रशासनिक दिवालियापन का बड़ा उदाहरण है।
