दुबई में फँसे झारखंड के 14 प्रवासी मजदूरों को राहत, भारतीय दूतावास की पहल से जल्द स्वदेश वापसी की उम्मीद

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पासपोर्ट जब्ती और वेतन कटौती का मामला: दुबई में फँसे झारखंड के 14 मजदूरों को मिली बड़ी राहत

दुबई/ दिल्ली : दुबई में फँसे झारखंड के 14 प्रवासी मजदूरों को आखिरकार बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से आर्थिक और मानसिक संकट झेल रहे इन मजदूरों के स्वदेश लौटने की उम्मीद अब प्रबल हो गई है। मशरिक बैंक, दुबई में कार्यरत झारखंड मूल के ज़ैद अहमद अंसारी को जब मीडिया के माध्यम से इन मजदूरों की स्थिति की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत झारखंड एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव मुसर्रफ हुसैन से संपर्क किया। मुसर्रफ हुसैन द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरणों के आधार पर पूरे मामले में सक्रिय हस्तक्षेप किया गया।

इसके बाद सभी 14 मजदूरों से व्यक्तिगत रूप से मुलाक़ात कर उनकी समस्याएँ सुनी गईं। जाँच में सामने आया कि संबंधित कंपनी द्वारा मजदूरों के वेतन में अनुचित कटौती की जा रही थी और कई महीनों से उनका भुगतान नहीं किया गया था। इससे मजदूर गंभीर मानसिक तनाव में थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी के एचआर को मौके पर बुलाकर सख़्त बातचीत की गई, जिसके बाद वेतन से जुड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू हुई। साथ ही, पूरे मामले की जानकारी भारतीय दूतावास को दी गई।

भारतीय दूतावास ने कंपनी प्रबंधन से सीधे संवाद कर मजदूरों के पासपोर्ट तत्काल दूतावास में जमा कराने और बकाया वेतन के शीघ्र भुगतान का निर्देश दिया।

जाँच के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी ने मजदूरों के एमिरेट्स आईडी और पासपोर्ट अपने पास रोक रखे थे, जो संयुक्त अरब अमीरात के क़ानूनों के अनुसार पूरी तरह अवैध है। इस पर कंपनी के एचआर को कड़ी फटकार लगाई गई।

सहायता मिलने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि सभी 14 प्रवासी मजदूर बहुत जल्द सुरक्षित रूप से अपने घर झारखंड लौट सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि दुबई में फँसे झारखंड के जिन 14 प्रवासी मजदूरों को इस पहल के बाद राहत मिली है, उनमें अजय कुमार, दलेश्वर महतो, रोहित महतो, सीमा महतो, दिलीप महतो, गंगाधर महतो, तिलकी महतो, बैजनाथ महतो, जलेश्वर महतो, फलेन्द्रा महतो, राजेश महतो, दीपक कुमार, रोशन कुमार और अजय कुमार (बदरी महतो) शामिल हैं। लंबे समय से वेतन न मिलने और दस्तावेज़ जब्त किए जाने के कारण ये सभी मजदूर गंभीर आर्थिक व मानसिक संकट से जूझ रहे थे, लेकिन अब उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी की उम्मीद जगी है।

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