
रांची: केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी), कांके, रांची से सेवा समाप्त किए गए 156 निजी सुरक्षाकर्मियों ने मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी व्यथा रखी। ये सभी सुरक्षाकर्मी सीआईपी सुरक्षाकर्मी अधिकार संघर्ष समिति के बैनर तले तीन फरवरी से अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं और पुनः नौकरी में बहाली की मांग कर रहे हैं।
समाजसेवी कमलेश राम के नेतृत्व में 156 सुरक्षाकर्मियों के पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन स्थित लोकभवन में राज्यपाल से भेंट कर नौकरी में बहाली करने को लेकर मांग पत्र सौंपा ।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि वे सभी सुरक्षाकर्मी पिछले 15 से 20 वर्षों से सीआईपी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में सेवा दे रहे थे, बावजूद इसके बिना किसी पूर्व सूचना और सुनवाई के उनकी सेवा समाप्त कर दी गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि नौकरी छिन जाने से 156 परिवारों के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। बच्चों की शिक्षा, परिवार का भरण-पोषण और सामाजिक सम्मान पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। अधिकांश सुरक्षाकर्मी स्थानीय निवासी हैं और समाज के गरीब, दलित-आदिवासी तथा पिछड़े वर्ग से आते हैं।
राज्यपाल ने सुरक्षाकर्मियों की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखने का आश्वासन दिया, ताकि उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मुलाकात के बाद समाजसेवी कमलेश राम ने कहा कि सीआईपी प्रशासन द्वारा 156 सुरक्षाकर्मियों की सेवा समाप्ति पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अमानवीय है। ये सभी सुरक्षाकर्मी वर्षों से ईमानदारी और निष्ठा के साथ संस्थान की सेवा कर रहे थे, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना और सुनवाई के उन्हें हटा दिया गया।
उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, बल्कि गरीब, दलित-आदिवासी और पिछड़े वर्ग से आने वाले परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है। कमलेश राम ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन शीघ्र हस्तक्षेप कर सुरक्षाकर्मियों को बहाल नहीं करता है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
वहीं राज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राज्यपाल ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई कार्रवाई को गलत बताया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का आश्वासन मिलने से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि जब तक 156 सुरक्षाकर्मियों की पुनः बहाली नहीं होती, तब तक उनका शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा।
सुरक्षाकर्मियों ने उम्मीद जताई है कि राज्यपाल के हस्तक्षेप से उन्हें न्याय मिलेगा और वे पुनः सम्मानपूर्वक अपने कार्य पर लौट सकेंगे।
मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में कमलेश राम, चंद्रमौलेश्वर कुमार, संगीता उरांव, अजय उरांव और बनीता गाड़ी शामिल है ।
