
भुखमरी के कगार पर 156 मजदूरों का परिवार

कांके: केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी) से हटाए गए सुरक्षाकर्मियों का आंदोलन गुरुवार को दसवें दिन भी जारी रहा। अपनी बहाली की मांग को लेकर सुरक्षाकर्मी संस्थान परिसर के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
हटाए गए सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि इस कार्रवाई से 156 मजदूरों के परिवार के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। सुरक्षाकर्मियों के अनुसार वे पिछले करीब 20 वर्षों से सीआईपी में निजी सुरक्षा कंपनी के माध्यम से कार्यरत थे, लेकिन अचानक नौकरी से हटा दिया गया ।

आंदोलनरत कर्मियों का कहना है कि उनकी उम्र अब ऐसी नहीं रही कि उन्हें आसानी से दूसरी जगह नौकरी मिल सके। रोजगार छिन जाने से उनके सामने परिवार के भरण-पोषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
सुरक्षाकर्मियों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पूर्व सूचना और स्पष्ट कारण बताए कार्यमुक्त कर दिया गया। उन्होंने प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए उन्हें पुनः सेवा में बहाल करने की मांग की है।

इस मामले को लेकर स्थानीय विधायक सुरेश बैठा, राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर सुरक्षाकर्मियों को पुनः नौकरी में बहाल करने की मांग की है।
हालांकि आंदोलन के दसवें दिन तक इस दिशा में कोई ठोस पहल या निर्णय सामने नहीं आ सका है।
धरना पर बैठे कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। वहीं, संस्थान प्रबंधन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान नहीं मिल सका है।
