पारंपरिक पूजा के साथ मोरहाबादी में दो दिवसीय राष्ट्रीय जतरा महोत्सव का शुभारंभ

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35 खोड़हा दलों ने लिया भाग, आदिवासी जीवन-परंपरा की दिखी सजीव झलक

रांची: राष्ट्रीय जतरा महोत्सव समिति के तत्वावधान में मोरहाबादी मैदान में शनिवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय जतरा महोत्सव की विधिवत शुरुआत हुई। महोत्सव का शुभारंभ हातमा मौजा के पाहन जगलाल पाहन द्वारा पारंपरिक आदिवासी पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेश-भूषा में उपस्थित रहे और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन किया।

महोत्सव में राज्य के विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों सहित कुल 35 खोड़ह शामिल हुए। रांची, गुमला, सिमडेगा सहित अन्य जिलों से आए खोड़हा दलों ने पारंपरिक नृत्य, गीत, वाद्ययंत्र, खान-पान और लोकाचार के माध्यम से आदिवासी जीवन पद्धति को मंच पर प्रस्तुत किया।

महोत्सव के अध्यक्ष नरेश पाहन ने कहा कि राष्ट्रीय जतरा महोत्सव झारखंड की आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामूहिक जीवन मूल्यों को सहेजने का प्रयास है। इसका उद्देश्य आदिवासी समाज की भाषा, रीति-रिवाज, पारंपरिक व्यंजन और वाद्ययंत्रों को संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी के बीच इसके प्रति जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति और समुदाय के साथ सामंजस्य का दर्शन है।

महोत्सव के संस्थापक सदस्य अंतु तिर्की ने कहा जतरा का यह तीसरा वर्ष है और यह जतरा आदिवासी समाज की आत्मा है, जो सामूहिकता, अनुशासन और परंपरागत मूल्यों पर आधारित है। ऐसे आयोजनों से हमारी सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है।

वहीं कोषाध्यक्ष सूरज टोप्पो ने कहा कि यह महोत्सव आदिवासी समाज की रूढ़िवादी लेकिन वैज्ञानिक जीवन शैली को समाज के अन्य वर्गों तक पहुंचाने का माध्यम है।

इस अवसर पर संस्थापक अंतु तिर्की, केंद्रीय अध्यक्ष नरेश पाहन, कार्यकारी अध्यक्ष विक्की नायक, महासचिव ज्योत्सना केरकेटा, कोषाध्यक्ष सूरज टोप्पो, उपाध्यक्ष अमित मुंडा, मीडिया प्रभारी निरंजन भारती सहित रवि मुंडा, विक्की करमाली, सुरेश मिर्धा, अरुण पाहन, अनिल उरांव, राधा हेंब्रम, मिथिलेश कुमार, राकेश मुंडा, अमित तिर्की, अशोक मुंडा, सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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