108 वर्षों की परंपरा का प्रतीक सुकुरहुटू डोल मेला संपन्न, एकता और आस्था की अनोखी मिसाल

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ऐतिहासिक सुकुरहुटू डोल मेले का विधायक सुरेश बैठा ने उदघाट्न किया


कांके (रांची): कांके प्रखंड के सुकुरहुटू गांव में 108 वर्षों से आयोजित होने वाला ऐतिहासिक डोल मेला इस वर्ष भी भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। राम जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित इस दो दिवसीय मेले का उद्घाटन विधायक सुरेश बैठा ने फीता काटकर किया। इस मौके पर उप प्रमुख अंजय बैठा एवं महावीर मंडल के अध्यक्ष राज कुमार महतो भी उपस्थित रहे।


मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी। कांके प्रखंड ही नहीं, बल्कि झारखंड के विभिन्न हिस्सों से लोग इस पारंपरिक मेले का आनंद लेने पहुंचे। आयोजन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोगों का खूब मनोरंजन किया और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।


विधायक सुरेश बैठा ने अपने संबोधन में कहा कि यह मेला सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की पहचान है। वहीं उप प्रमुख अंजय बैठा ने भी इस आयोजन को ग्रामीण एकजुटता और हिंदू। मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया। मेले का आयोजन पूर्णतः शांति और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। आयोजकों ने ग्रामीणों एवं कांके प्रशासन के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।


गौरतलब है कि इस मेले की शुरुआत लगभग 107 वर्ष पूर्व उस समय हुई थी, जब गांव में हैजा महामारी ने विकराल रूप ले लिया था और सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। उसी दौरान अयोध्या से आए संतों के सुझाव पर राम नवमी के अवसर पर श्रद्धा के साथ डोल मेला आयोजित किया गया, जिसके बाद बीमारी समाप्त हो गई। तब से यह परंपरा निरंतर जारी है।


मेले की एक विशेषता यह भी है कि आयोजन के दौरान पूरे गांव में मांस और मदिरा पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। गांव के लोग विधि-विधान के साथ मिलजुलकर इस आयोजन को सफल बनाते हैं।


आज के समय में, जब समाज को विभाजित करने की कोशिशें हो रही हैं, ऐसे में सुकुरहुटू का यह डोल मेला एकता, प्रेम और भाईचारे की मिसाल बनकर सामने आया है। यह मेला आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और भारतीय संस्कृति पर गर्व करने का संदेश देता है।

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