विरासत, संस्कृति और प्रकृति का संगम है सरहुल: हरिनाथ साहू

जन सभा विशेष झारखंड राजनीति
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कांके: कांके प्रखंड के पिठोरिया, ऊपर कोनकी और जिद्दू गांवों में आयोजित प्राकृतिक पर्व सरहुल मिलन समारोह में आदिवासी लोकगीत और संगीत की गूंज से पूरा माहौल उत्साह से भर उठा। मांदर की थाप पर लोग देर तक झूमते रहे और पारंपरिक नृत्य-गान ने सभी का मन मोह लिया।

इस अवसर पर लोकहित अधिकार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाथ साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सरहुल पर्व आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति, विरासत और प्रकृति से अटूट लगाव का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की सीख देता है।

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश महासचिव प्रमोद प्रसाद गुप्ता, रांची जिला अध्यक्ष प्रेमचंद साहू, अशोक राम एवं महासचिव सूरज यादव भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने सरहुल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का पर्व बताया।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने लोकगीतों और नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। मांदर की गूंज, परंपरागत धुनों और सामूहिक उत्साह ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।

इस अवसर पर ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने यह साबित किया कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की जीवित विरासत है, जो आज भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ी हुई है।

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