कार्तिक उरांव की धरती पर राष्ट्रपति का आगमन, गुमला बनेगा आदिवासी सांस्कृतिक समागम का केंद्र

अभी अभी आदिवासी झारखंड
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गुमला/रायडीह: गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में आयोजित दो दिवसीय अंतरराज्यीय जन सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ मंगलवार को ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पूरे जिले में उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।


यह भव्य आयोजन पंखराज साहेब कार्तिक उरांव चौक बैरियर बगीचा, मांझाटोली में हो रहा है, जहां झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों से आई आदिवासी सांस्कृतिक मंडलियां अपनी पारंपरिक खोड़हादल नृत्य, लोकगीत और वेशभूषा के माध्यम से समृद्ध आदिवासी विरासत का प्रदर्शन करेंगी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी रहेंगे मौजूद…

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव तथा एसटी-एससी विषयक संसदीय समिति के अध्यक्ष फगन सिंह कुलस्ते भी शिरकत करेंगे।


राष्ट्रपति के दौरे को लेकर जिला एवं प्रखंड प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, निगरानी व्यवस्था और प्रवेश नियंत्रण की विशेष व्यवस्था की गई है।


कार्तिक उरांव के सपनों को समर्पित है ‘कार्तिक जतरा’


पंखराज साहेब कार्तिक उरांव आदिवासी शक्ति स्वायत्तशासी विश्वविद्यालय निर्माण समिति के संयोजक एवं प्रदेश भाजपा एसटी मोर्चा अध्यक्ष शिवशंकर उरांव ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में आदिवासी संस्कृति के पुनरुद्धार, सुदृढ़ीकरण और शैक्षिक उत्थान को बढ़ावा देना है।


उन्होंने बताया कि कार्तिक उरांव का सपना था कि इस क्षेत्र में एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय की स्थापना हो, जिसे उन्होंने ‘शांति निकेतन’ नाम देने का प्रस्ताव रखा था। वर्ष 1981 में उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार के समक्ष मांग रखी थी। उनका उद्देश्य था कि आदिवासी बच्चों को पहली कक्षा से लेकर पीजी तक गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा मिले तथा आदिवासी संस्कृति सुरक्षित रहे।


कौन थे कार्तिक उरांव…


कार्तिक उरांव झारखंड के प्रख्यात आदिवासी नेता, शिक्षाविद और समाज सुधारक थे। वे लंदन से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले पहले आदिवासी भारतीय थे। उन्होंने संसद में निजी विधेयक लाकर धर्मांतरण करने वाले आदिवासियों को आरक्षण लाभ न देने की वकालत की थी।


आदिवासी अधिकारों, जमीन और पहचान की रक्षा के लिए उन्होंने आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने वर्ष 1968 में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की स्थापना की। वे लोहरदगा लोकसभा सीट से तीन बार (1967, 1971, 1980) सांसद निर्वाचित हुए।


सुबह 7 से शाम 5 बजे तक नो फ्लाई जोन


राष्ट्रपति के आगमन और सुरक्षा को देखते हुए 30 दिसंबर को गुमला जिले के हवाई क्षेत्र में सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित किया गया है। इस दौरान ड्रोन, पैराग्लाइडर या किसी भी प्रकार के हवाई उपकरण के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद राष्ट्रपति हेलीकॉप्टर से रांची लौटेंगी और फिर दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।

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