बाबूलाल मरांडी ने MMDR संशोधन विधेयक 2026 पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को जवाबी पत्र लिखते हुए झारखंड की खनन नीति, सेस, रॉयल्टी, अवैध खनन और वित्तीय कुप्रबंधन पर सवाल उठाए

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द जन सभा | डेस्क

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा एमएमडीआर संशोधन विधेयक, 2026 के मुद्दे पर लिखे गए पत्र का जवाब दिया है। मरांडी ने कहा कि झारखंड के आर्थिक नुकसान का पूरा दोष केंद्र सरकार पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एमएमडीआर संशोधन पूरे देश में समान रूप से लागू है, तो केवल झारखंड की झामुमो-कांग्रेस सरकार को इससे परेशानी क्यों हो रही है।

मरांडी ने कहा कि केंद्र से राज्य का जायज हक मांगना गलत नहीं है, लेकिन झारखंड को हो रहे आर्थिक नुकसान के लिए केवल दिल्ली को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की खनन, सेस और कर नीतियों के कारण भी राजस्व को नुकसान हुआ है। पत्र में उन्होंने रॉयल्टी आय में कमी और कोयला तथा लौह अयस्क पर भारी उपकर लगाए जाने का मुद्दा उठाया है।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि वैध खनिजों पर बढ़े कर के बोझ से झारखंड के खनिज बाजार में महंगे हो गए, जबकि अवैध खनन को बढ़ावा मिलने की स्थिति बन गई। उन्होंने बंद पड़ी खदानों, क्रशर उद्योगों और खनन क्षेत्र में प्रभावित स्थानीय मजदूरों का मुद्दा भी उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा कि वैध खदानें आखिर कब तक बंद रहेंगी।

बाबूलाल मरांडी ने ओडिशा का उदाहरण देते हुए झारखंड में खदानों की नीलामी, खनिज उत्पादन और राजस्व बढ़ाने की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने बालू घाटों और पत्थर खदानों की नीलामी में देरी का मुद्दा भी उठाया। साथ ही, राज्य के वित्तीय प्रबंधन, बजट खर्च, केंद्रीय अनुदान और खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए मिलने वाली डीएमएफटी राशि के उपयोग पर भी सरकार को घेरा।

पत्र में मरांडी ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से सीधा सवाल किया कि क्या वह इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों से भी सवाल पूछने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन राज्य और उसकी जवाबदेही स्थायी होती है। मरांडी के इस जवाबी पत्र के बाद झारखंड की खनन नीति, राजस्व और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।

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