टंडवा: टंडवा क्षेत्र में एनटीपीसी से निकलने वाली जहरीली राख ने आम लोगों का जीना दूभर कर दिया है। टंडवा–सिमरिया मुख्य मार्ग सहित कई ग्रामीण सड़कों पर गीली राख का अंबार पसरा हुआ है, जिससे राहगीर, दोपहिया वाहन चालक और स्थानीय निवासी गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी प्लांट से गीली राख को बिना किसी मानक सुरक्षा व्यवस्था के ट्रकों में लोड कर खुलेआम सड़कों पर ढोया जा रहा है। यह राख परिवहन के दौरान जगह-जगह सड़क पर गिरती है, जिससे सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि, क्या एनटीपीसी प्रबंधन और राख परिवहन करने वाले ट्रांसपोर्टर किसी की जान जाने का इंतजार कर रहे हैं?
गीली राख ढोने से पहले ट्रकों को कवर क्यों नहीं किया जाता? प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन आखिर आंख मूंदकर क्या देख रहा है?
राख से उड़ने वाली जहरीली धूल बुजुर्गों और दमा, सांस रोगियों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। कई ग्रामीणों ने आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और त्वचा रोग की शिकायतें की हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रांसपोर्टरों की लापरवाही और मुनाफाखोरी के आगे आमजन की जान की कोई कीमत नहीं बची है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या नियम सिर्फ कागजों में हैं? या फिर एनटीपीसी और ट्रांसपोर्टरों को कानून से ऊपर मान लिया गया है?
यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो टंडवा की सड़कें केवल राख का ढेर नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बन जाएंगी।
अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो, ट्रांसपोर्टरों की जवाबदेही तय हो और आम लोगों को जहरीली राख से राहत मिले।
