प्रकृति महापर्व सरहुल पर तीन दिवसीय राजकीय अवकाश घोषित करने की मांग

अभी अभी आदिवासी
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रविवार को सरना पूजा स्थल मिसिर गोंदा में बिरसा विकास जन कल्याण समिति, मिसिर गोंदा के तत्वावधान में आगामी प्रकृति महापर्व सरहुल पूजा 2026 की तैयारी को लेकर एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता गांव के पाहन बिरसा पाहन ने की, जबकि संचालन ललित लिंडा ने किया।


बैठक में गांव के मुख्य पाहन बिरसा पाहन ने बताया कि इस वर्ष 20 मार्च 2026 (चैत्र शुक्ल द्वितीया) को उपवास, केकड़ा-मछली पकड़ाई तथा शाम 7 बजे मिसिर गोंदा कांके डैम पार्क स्थित पवित्र सरना स्थल में पारंपरिक रीति-रिवाज से जल रखाई पूजा होगी। 21 मार्च 2026 (चैत्र शुक्ल तृतीया) को सुबह 8 बजे सरना स्थल में मुख्य पूजा आरंभ होगी, जबकि दोपहर 2 बजे मिसिर गोंदा सरना स्थल से सिरोम टोली सरना स्थल तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। वहीं 22 मार्च 2026 (चैत्र शुक्ल चतुर्थी) को फूलखोंसी (पुष्प अर्पण) का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।


समिति के अध्यक्ष अनिल उरांव ने कहा कि इस वर्ष सरहुल शोभायात्रा पूरे आदिवासी समाज की भागीदारी के साथ भव्य रूप से निकाली जाएगी, जिससे समाज की एकजुटता का संदेश जाएगा। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से प्रकृति महापर्व सरहुल के अवसर पर तीन दिवसीय राजकीय अवकाश घोषित करने की मांग की, ताकि आदिवासी समाज के लोग इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मना सकें।


समिति के संरक्षक सुरेश टोप्पो ने कहा कि सरहुल पूजा आदिवासियों का प्रमुख प्रकृति पर्व है, जिसमें उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान झलकती है। उन्होंने समाज से पारंपरिक नृत्य, गीत और वेशभूषा के साथ सरहुल पर्व मनाने की अपील की।


बैठक में आशा उरांव, बसंती कुजूर, सीता हेमरोम, रीना उरांव, सत्यवती देवी, मांगा उरांव, सुरेश टोप्पो, सुरजु उरांव, शिबू उरांव, जगन्नाथ उरांव, आशीष लकड़ा, राजा लकड़ा, संजय उरांव, विकास लकड़ा, बिट्टू उरांव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

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